Tuesday, June 16, 2015

दिल्ली सल्तनत का संक्षिप्त इतिहास

दिल्ली सल्तनत

१२वीं सदी के अंत तक भारत पर तुर्क, अफ़गान तथा फ़ारसी आक्रमण बहुत तेज हो गए थे। महमूद गज़नवी के बारंबार आक्रमण ने दिल्ली सल्तनत को हिला कर रख दिया। ११९२ इस्वी में तराईन के युद्ध में दिल्ली का शासक पृथ्वीराज चौहान पराजित हुआ और इसके बाद दिल्ली की सत्ता पर पश्चिमी आक्रांताओं का कब्जा हो गया। हालाँकि महमूद पृथ्वी राज को हराकर वापस लौट गया पर उसके ग़ुलामों (दास) ने दिल्ली की सत्ता पर राज किया और आगे यही दिल्ली सल्तनत की नींव साबित हुई।

ग़ुलाम वंश

ग़ुलाम वंश की स्थापना के साथ ही भारत में इस्लामी शासन आरंभ हो गया था। कुतुबुद्दीन ऐबक (१२०६ - १२१०) इस वंश का प्रथम शासक था। इसेक बाद इल्तुतमिश (१२११-१२३६), रजिया सुल्तान (१२३६-१२४०) तथा अन्य कई शासकों के बाद उल्लेखनीय रूप से गयासुद्दीन बलबन (१२५०-१२९०) सुल्तान बने। इल्तुतमिश के समय :छिटपुट मंगोल आक्रमण भी हुए। पर भारत पर कभी भी मंगोलों का बड़ा आक्रमण नहीं हुआ और मंगोल (फ़ारसी में मुग़ल) ईरान, तुर्की और मध्यपूर्व तथा मध्य एशिया में सीमित रहे।

ख़िलजी वंश

ख़िलजी वंश को दिल्ली सल्तनत के विस्तार की तरह देखा जाता है। जलालुद्दीन फीरोज़ खिल्जी, जो कि इस वंश का संस्थापक था वस्तुतः बलबन की मृत्यु के बाद सेनापति नियुक्त किया गया था। पर उसने सुल्तान कैकूबाद की हत्या कर दी और खुद सुल्तान बन बैठा। इसके बाद उसका दामाद अल्लाउद्दीन खिल्जी शासक बना। अल्लाउद्दीन ने न सिर्फ अपने साम्राज्य का विस्तार किया बल्कि उत्तर पश्चिम से होने वाले मंगोल आक्रमणो का सामना भी डटकर किया।

तुग़लक़ वंश

गयासुद्दीन तुग़लक़, [[मुहम्मद बिन तुग़लक़, फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ आदि इस वंश के प्रमुख शासक थे। फ़िरोज के उत्तराधिकारी, तैमूर लंग के आक्रमण का सामना नहीं कर सके और तुग़लक़ वंश का पतन १४०० इस्वी तक हो गया था। हालांकि तुग़लक़ व शासक अब भी राज करते थे पर उनकी शक्ति क्षीण हो चुकी थी। मुहम्मद बिन तुग़लक़ वो पहला मुस्लिम शासक था जिसने दक्षिण भारत में साम्राज्य विस्तार के लिए प्रयत्न किया। इसकारण उसने अपनी राजधानी दौलताबाद कर दी।

सय्यद वंश

सय्यद वंशा की स्थापना १४१४ इस्वी में खिज्र खाँ के द्वारा हुई थी। यह वंश अधिक समाय तक सत्ता मे नहीं रह सका और इसके बाद लोदी वंश सत्ता में आया।

लोधी वंश

लोधी वंश की स्थापना १४५१ में तथा पतन बाबर के आक्रमण से १५२६ में हुआ। इब्राहीम लोदी इसका आखिरी शासक था।

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